मुहब्बत में करे क्या कुछ किसी से हो नहीं सकता / दाग़ देहलवी

मुहब्बत में करे क्या कुछ किसी से हो नहीं सकता
मेरा मरना भी तो मेरी ख़ुशी से हो नही सकता

न रोना है तरीक़े का न हंसना है सलीके़ का
परेशानी में कोई काम जी से हो नहीं सकता

ख़ुदा जब दोस्त है ऐ ‘दाग़’ क्या दुश्मन से अन्देशा
हमारा कुछ किसी की दुश्मनी से हो नहीं सकता

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